Monday, April 27, 2015

अनियंत्रित मन

मन का सबसे बड़ा शत्रु है नियंत्रण। और अनियंत्रित मन आपका सबसे बड़ा शत्रु है।
नियंत्रण से मन का क्या बैर है?
मन की गति सृष्टि में सर्वाधिक होती है। और कर्मेंद्रियों पर नियंत्रण कर मन मानव को भांति भांति की गतिविधियों में वयस्त रखता है। काम, क्रोध,लोभ मोह आदि केवल मन की गतियाँ ही हैं। आप अपनी इच्छा से लगातार क्रोधित भी नहीं रह सकते। प्रयास करें, थोड़ी देर में स्वतः हंसी आ जायेगी।
मन का सीधा संबंध ध्यान से है।
जैसे ही लगातार किसी एक कार्य पर ध्यान केन्द्रित करने की कोशिश की जाती है, मन उसका विरोध करना शुरू कर देता है। परिणाम में प्राप्त होता है ध्यानभंग।
अब सभी विद्वानों ने जोर दिया है प्रशिक्षण, अभ्यास और त्याग पर।
लेकिन यह सब इन्द्रिय नियंत्रण की क्रियाएँ हैं। केवल इनपर निर्भर व्यक्ति को कुछ वर्षों के बाद प्राप्त होता है अत्यधिक मात्रा में अवसाद।
दो कारणों से - लगातार अभ्यास के बाद भी जरा से प्रलोभन पर इन्द्रियों का डोल जाना और त्याग की यात्रा में रोज चलने के बाद भी स्वयं को आरंभ में खड़े पाना।
तो जब कोई साधक ये पाता है कि इतने परिश्रम के बाद भी दिखावटी जीवन जीना पड़ रहा है तो या तो वह प्रपंच को ओढ़ लेता है या दूसरे गुरु की तलाश में लग जाता है।
जो नहीं करता वह यह कि इन्द्रिय दमन की बजाय आत्मावलोकन करे और अपने विचारों को शुद्ध करने की ओर अग्रसर हो।
~सचिन्द्र 'अपुर्ण '~

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