Monday, April 27, 2015

जीवन में लक्ष्य

जीवन में लक्ष्य का पता होना आवश्यक है। लक्ष्य तुम्हें नदी बनाता है, जो कभी धीमी कभी तेज परन्तु निरन्तर गतिशील रहकर अन्ततः अपने सागर में समा जाती है। ऐसे ही तुम्हें भी पता होना चाहिए कि तुम अपुर्ण ही हो अभी, और लक्ष्य है पुर्णता। उस परमात्मा के अंश हो अभी, लक्ष्य है उसमें विलीन हो जाना।
अनेक मार्ग हैं, सम्प्रदाय हैं, ग्रंथ हैं, प्रतीक हैं, उनके भजन हैं।
और देखो उस करुणानिधान की कृपा, सारे मार्ग उस तक ही जाते हैं। बस ध्यान रखना आवश्यक है कि मार्ग में बहुत से प्रलोभन मिलेंगे, सिद्ध और सिद्धियाँ मिलेंगे, जो तुम्हें बांध कर वापस प्रारंभ पर ला खड़ा करेंगे।

इसलिए सावधानी पूर्वक चलना है, जैसे महिला आग में रोटी सेक लेती है बिना हाथ जलाये ।।
~ सचिन्द्र 'अपुर्ण' ~

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